पंचांग 3 दिसंबर 2022

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

3 दिसंबर 2022 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:51
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय14:42
चंद्रास्त03:19 (4 दिस॰)
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत)
संवत:
शक 1944 · विक्रम (चैत्रादि) 2079
संवत्सर:
शुभकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
मीन 06:16 (4 दिस॰) तक, फिर मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 05:34 (4 दिस॰) तक, फिर शुक्ल द्वादशी 05:58 (5 दिस॰) तक
नक्षत्र
रेवती 06:16 (4 दिस॰) तक, फिर अश्विनी 07:14 (5 दिस॰) तक
योग
व्यतीपात 04:34 (4 दिस॰) तक, फिर वरीयान 03:40 (5 दिस॰) तक
करण
वणिज 17:33 तक, फिर विष्टि 05:34 (4 दिस॰) तक, फिर बव 17:43 (4 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:02 – 12:46
  • राहु काल09:37 – 11:01
  • यमगंड13:47 – 15:10
  • गुलिक काल06:51 – 08:14

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:51 – 08:14
  • शुभ(शुभ)08:14 – 09:37
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:37 – 11:01
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:01 – 12:24
  • चर(सामान्य)12:24 – 13:47
  • लाभ(शुभ)13:47 – 15:10
  • अमृत(शुभ)15:10 – 16:33
  • काल(वर्जित (परंपरा))16:33 – 17:56

रात

  • लाभ(शुभ)17:56 – 19:33
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:33 – 21:10
  • शुभ(शुभ)21:10 – 22:47
  • अमृत(शुभ)22:47 – 00:24 (4 दिस॰)
  • चर(सामान्य)00:24 (4 दिस॰) – 02:01 (4 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:01 (4 दिस॰) – 03:38 (4 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:38 (4 दिस॰) – 05:15 (4 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)05:15 (4 दिस॰) – 06:52 (4 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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