पंचांग 20 अक्टूबर 2022
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
20 अक्टूबर 2022 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:29
सूर्यास्त18:08
चंद्रोदय02:41 (21 अक्टू॰)
चंद्रास्त15:05
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1944 · विक्रम (चैत्रादि) 2079
- संवत्सर:
- शुभकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- कर्क 10:30 तक, फिर सिंह
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- कृष्ण दशमी 16:05 तक, फिर कृष्ण एकादशी 17:23 (21 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- आश्लेषा 10:30 तक, फिर मघा 12:28 (21 अक्टू॰) तक
- योग
- शुभ 17:52 तक, फिर शुक्ल 17:46 (21 अक्टू॰) तक
- करण
- विष्टि 16:05 तक, फिर बव 04:48 (21 अक्टू॰) तक, फिर बालव 17:23 (21 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:42
- राहु काल13:46 – 15:14
- यमगंड06:29 – 07:57
- गुलिक काल09:24 – 10:51
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)06:29 – 07:57
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:57 – 09:24
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:51
- चर(सामान्य)10:51 – 12:19
- लाभ(शुभ)12:19 – 13:46
- अमृत(शुभ)13:46 – 15:14
- काल(वर्जित (परंपरा))15:14 – 16:41
- शुभ(शुभ)16:41 – 18:08
रात
- अमृत(शुभ)18:08 – 19:41
- चर(सामान्य)19:41 – 21:14
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:14 – 22:46
- काल(वर्जित (परंपरा))22:46 – 00:19 (21 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)00:19 (21 अक्टू॰) – 01:52 (21 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:52 (21 अक्टू॰) – 03:24 (21 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)03:24 (21 अक्टू॰) – 04:57 (21 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)04:57 (21 अक्टू॰) – 06:30 (21 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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