पंचांग 14 जून 2022
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
14 जून 2022 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय05:57
सूर्यास्त19:11
चंद्रोदय19:18
चंद्रास्तनहीं
- मास:
- ज्येष्ठ (अमांत)
- संवत:
- शक 1944 · विक्रम (चैत्रादि) 2079
- संवत्सर:
- शुभकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- वृषभ
- चंद्र राशि:
- वृश्चिक 18:32 तक, फिर धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- शुक्ल पूर्णिमा 17:21 तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 13:32 (15 जून) तक
- नक्षत्र
- ज्येष्ठा 18:32 तक, फिर मूल 15:32 (15 जून) तक
- योग
- साध्य 09:39 तक, फिर शुभ 05:27 (15 जून) तक, फिर शुक्ल 01:14 (16 जून) तक
- करण
- विष्टि 07:14 तक, फिर बव 17:21 तक, फिर बालव 03:27 (15 जून) तक, फिर कौलव 13:32 (15 जून) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:08 – 13:01
- राहु काल15:53 – 17:32
- यमगंड09:16 – 10:55
- गुलिक काल12:34 – 14:14
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))05:57 – 07:37
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:37 – 09:16
- चर(सामान्य)09:16 – 10:55
- लाभ(शुभ)10:55 – 12:34
- अमृत(शुभ)12:34 – 14:14
- काल(वर्जित (परंपरा))14:14 – 15:53
- शुभ(शुभ)15:53 – 17:32
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:32 – 19:11
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))19:11 – 20:32
- लाभ(शुभ)20:32 – 21:53
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:53 – 23:14
- शुभ(शुभ)23:14 – 00:34 (15 जून)
- अमृत(शुभ)00:34 (15 जून) – 01:55 (15 जून)
- चर(सामान्य)01:55 (15 जून) – 03:16 (15 जून)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:16 (15 जून) – 04:37 (15 जून)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:37 (15 जून) – 05:57 (15 जून)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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