पंचांग 2 नवंबर 2019

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

2 नवंबर 2019 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:34
सूर्यास्त18:01
चंद्रोदय11:27
चंद्रास्त22:44
मास:
कार्तिक (अमांत)
संवत:
शक 1941 · विक्रम (चैत्रादि) 2076
संवत्सर:
विकारी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
धनु 05:25 (3 नव॰) तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 01:31 (3 नव॰) तक, फिर शुक्ल सप्तमी 02:56 (4 नव॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 23:01 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 00:54 (4 नव॰) तक
योग
सुकर्मा 06:50 तक, फिर धृति 06:23 (3 नव॰) तक, फिर शूल 06:28 (4 नव॰) तक
करण
कौलव 13:05 तक, फिर तैतिल 01:31 (3 नव॰) तक, फिर गर 14:08 (3 नव॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:40
  • राहु काल09:26 – 10:52
  • यमगंड13:43 – 15:09
  • गुलिक काल06:34 – 08:00

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:34 – 08:00
  • शुभ(शुभ)08:00 – 09:26
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:26 – 10:52
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:52 – 12:18
  • चर(सामान्य)12:18 – 13:43
  • लाभ(शुभ)13:43 – 15:09
  • अमृत(शुभ)15:09 – 16:35
  • काल(वर्जित (परंपरा))16:35 – 18:01

रात

  • लाभ(शुभ)18:01 – 19:35
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:35 – 21:09
  • शुभ(शुभ)21:09 – 22:44
  • अमृत(शुभ)22:44 – 00:18 (3 नव॰)
  • चर(सामान्य)00:18 (3 नव॰) – 01:52 (3 नव॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))01:52 (3 नव॰) – 03:26 (3 नव॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:26 (3 नव॰) – 05:00 (3 नव॰)
  • लाभ(शुभ)05:00 (3 नव॰) – 06:34 (3 नव॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें