पंचांग 9 सितंबर 2018
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
9 सितंबर 2018 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:42
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त18:38
- मास:
- श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1940 · विक्रम (चैत्रादि) 2075
- संवत्सर:
- विलंबी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- सिंह
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण अमावस्या 23:31 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 20:35 (10 सित॰) तक
- नक्षत्र
- मघा 08:01 तक, फिर पूर्वाफाल्गुनी 05:41 (10 सित॰) तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 03:39 (11 सित॰) तक
- योग
- सिद्ध 14:42 तक, फिर साध्य 11:06 (10 सित॰) तक
- करण
- चतुष्पद 13:05 तक, फिर नाग 23:31 तक, फिर किंस्तुघ्न 10:01 (10 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:56
- राहु काल17:09 – 18:42
- यमगंड12:31 – 14:04
- गुलिक काल15:37 – 17:09
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:21 – 07:53
- चर(सामान्य)07:53 – 09:26
- लाभ(शुभ)09:26 – 10:59
- अमृत(शुभ)10:59 – 12:31
- काल(वर्जित (परंपरा))12:31 – 14:04
- शुभ(शुभ)14:04 – 15:37
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:37 – 17:09
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:09 – 18:42
रात
- शुभ(शुभ)18:42 – 20:09
- अमृत(शुभ)20:09 – 21:37
- चर(सामान्य)21:37 – 23:04
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:04 – 00:31 (10 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:31 (10 सित॰) – 01:59 (10 सित॰)
- लाभ(शुभ)01:59 (10 सित॰) – 03:26 (10 सित॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:26 (10 सित॰) – 04:54 (10 सित॰)
- शुभ(शुभ)04:54 (10 सित॰) – 06:21 (10 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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