पंचांग 10 अगस्त 2017
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
10 अगस्त 2017 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:14
सूर्यास्त19:04
चंद्रोदय21:01
चंद्रास्त08:18
- मास:
- श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1939 · विक्रम (चैत्रादि) 2074
- संवत्सर:
- हेमलंबी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कर्क
- चंद्र राशि:
- कुंभ 00:08 (11 अग॰) तक, फिर मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- कृष्ण तृतीया 00:33 (11 अग॰) तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 23:57 (11 अग॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वभाद्रपदा 06:12 (11 अग॰) तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 06:13 (12 अग॰) तक
- योग
- अतिगण्ड 16:57 तक, फिर सुकर्मा 15:34 (11 अग॰) तक
- करण
- वणिज 12:41 तक, फिर विष्टि 00:33 (11 अग॰) तक, फिर बव 12:18 (11 अग॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:05
- राहु काल14:16 – 15:52
- यमगंड06:14 – 07:51
- गुलिक काल09:27 – 11:03
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)06:14 – 07:51
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:51 – 09:27
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:03
- चर(सामान्य)11:03 – 12:39
- लाभ(शुभ)12:39 – 14:16
- अमृत(शुभ)14:16 – 15:52
- काल(वर्जित (परंपरा))15:52 – 17:28
- शुभ(शुभ)17:28 – 19:04
रात
- अमृत(शुभ)19:04 – 20:28
- चर(सामान्य)20:28 – 21:52
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:52 – 23:16
- काल(वर्जित (परंपरा))23:16 – 00:39 (11 अग॰)
- लाभ(शुभ)00:39 (11 अग॰) – 02:03 (11 अग॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:03 (11 अग॰) – 03:27 (11 अग॰)
- शुभ(शुभ)03:27 (11 अग॰) – 04:51 (11 अग॰)
- अमृत(शुभ)04:51 (11 अग॰) – 06:15 (11 अग॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
अपनी कुंडली देखें