पंचांग 21 अगस्त 2016
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
21 अगस्त 2016 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:17
सूर्यास्त18:57
चंद्रोदय21:19
चंद्रास्त08:55
- मास:
- श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1938 · विक्रम (चैत्रादि) 2073
- संवत्सर:
- दुर्मुख (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण तृतीया 08:17 तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 05:43 (22 अग॰) तक, फिर कृष्ण पंचमी 03:09 (23 अग॰) तक
- नक्षत्र
- उत्तरभाद्रपदा 18:45 तक, फिर रेवती 16:58 (22 अग॰) तक
- योग
- धृति 11:14 तक, फिर शूल 08:03 (22 अग॰) तक
- करण
- विष्टि 08:17 तक, फिर बव 19:01 तक, फिर बालव 05:43 (22 अग॰) तक, फिर कौलव 16:26 (22 अग॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:02
- राहु काल17:22 – 18:57
- यमगंड12:37 – 14:12
- गुलिक काल15:47 – 17:22
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:17 – 07:52
- चर(सामान्य)07:52 – 09:27
- लाभ(शुभ)09:27 – 11:02
- अमृत(शुभ)11:02 – 12:37
- काल(वर्जित (परंपरा))12:37 – 14:12
- शुभ(शुभ)14:12 – 15:47
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:47 – 17:22
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:22 – 18:57
रात
- शुभ(शुभ)18:57 – 20:22
- अमृत(शुभ)20:22 – 21:47
- चर(सामान्य)21:47 – 23:12
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:12 – 00:37 (22 अग॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:37 (22 अग॰) – 02:02 (22 अग॰)
- लाभ(शुभ)02:02 (22 अग॰) – 03:27 (22 अग॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:27 (22 अग॰) – 04:52 (22 अग॰)
- शुभ(शुभ)04:52 (22 अग॰) – 06:17 (22 अग॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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