पंचांग 31 अगस्त 2015

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

31 अगस्त 2015 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:19
सूर्यास्त18:50
चंद्रोदय20:10
चंद्रास्त07:41
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1937 · विक्रम (चैत्रादि) 2072
संवत्सर:
मन्मथ (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 16:50 तक, फिर कृष्ण तृतीया 13:24 (1 सित॰) तक
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा 09:55 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 07:13 (1 सित॰) तक
योग
धृति 09:50 तक, फिर शूल 05:50 (1 सित॰) तक, फिर गण्ड 02:04 (2 सित॰) तक
करण
तैतिल 06:37 तक, फिर गर 16:50 तक, फिर वणिज 03:05 (1 सित॰) तक, फिर विष्टि 13:24 (1 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:09 – 12:59
  • राहु काल07:53 – 09:27
  • यमगंड11:01 – 12:34
  • गुलिक काल14:08 – 15:42

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:19 – 07:53
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:53 – 09:27
  • शुभ(शुभ)09:27 – 11:01
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:01 – 12:34
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:34 – 14:08
  • चर(सामान्य)14:08 – 15:42
  • लाभ(शुभ)15:42 – 17:16
  • अमृत(शुभ)17:16 – 18:50

रात

  • चर(सामान्य)18:50 – 20:16
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:16 – 21:42
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:42 – 23:08
  • लाभ(शुभ)23:08 – 00:34 (1 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:34 (1 सित॰) – 02:01 (1 सित॰)
  • शुभ(शुभ)02:01 (1 सित॰) – 03:27 (1 सित॰)
  • अमृत(शुभ)03:27 (1 सित॰) – 04:53 (1 सित॰)
  • चर(सामान्य)04:53 (1 सित॰) – 06:19 (1 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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