पंचांग 25 मार्च 2015

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

25 मार्च 2015 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:35
सूर्यास्त18:46
चंद्रोदय10:33
चंद्रास्त23:49
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1937 · विक्रम (चैत्रादि) 2072
संवत्सर:
मन्मथ (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 00:53 (26 मार्च) तक, फिर शुक्ल सप्तमी 00:54 (27 मार्च) तक
नक्षत्र
रोहिणी 01:56 (26 मार्च) तक, फिर मृगशीर्ष 02:38 (27 मार्च) तक
योग
प्रीति 13:23 तक, फिर आयुष्मान 11:57 (26 मार्च) तक
करण
कौलव 13:10 तक, फिर तैतिल 00:53 (26 मार्च) तक, फिर गर 12:47 (26 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:16 – 13:05परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:40 – 14:12
  • यमगंड08:06 – 09:37
  • गुलिक काल11:09 – 12:40

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:35 – 08:06
  • अमृत(शुभ)08:06 – 09:37
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:37 – 11:09
  • शुभ(शुभ)11:09 – 12:40
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:40 – 14:12
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:12 – 15:43
  • चर(सामान्य)15:43 – 17:15
  • लाभ(शुभ)17:15 – 18:46

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:46 – 20:15
  • शुभ(शुभ)20:15 – 21:43
  • अमृत(शुभ)21:43 – 23:11
  • चर(सामान्य)23:11 – 00:40 (26 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:40 (26 मार्च) – 02:08 (26 मार्च)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:08 (26 मार्च) – 03:37 (26 मार्च)
  • लाभ(शुभ)03:37 (26 मार्च) – 05:05 (26 मार्च)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:05 (26 मार्च) – 06:34 (26 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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