पंचांग 4 अक्टूबर 2014
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
4 अक्टूबर 2014 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:25
सूर्यास्त18:20
चंद्रोदय15:04
चंद्रास्त03:01 (5 अक्टू॰)
- मास:
- आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1936 · विक्रम (चैत्रादि) 2071
- संवत्सर:
- जय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- मकर 05:13 (5 अक्टू॰) तक, फिर कुंभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- शुक्ल दशमी 07:24 तक, फिर शुक्ल एकादशी 04:32 (5 अक्टू॰) तक, फिर शुक्ल द्वादशी 01:27 (6 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- श्रवण 18:19 तक, फिर धनिष्ठा 16:05 (5 अक्टू॰) तक
- योग
- सुकर्मा 07:16 तक, फिर धृति 03:47 (5 अक्टू॰) तक, फिर शूल 00:08 (6 अक्टू॰) तक
- करण
- गर 07:24 तक, फिर वणिज 18:00 तक, फिर विष्टि 04:32 (5 अक्टू॰) तक, फिर बव 15:01 (5 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:59 – 12:47
- राहु काल09:24 – 10:53
- यमगंड13:52 – 15:22
- गुलिक काल06:25 – 07:55
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:25 – 07:55
- शुभ(शुभ)07:55 – 09:24
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:53
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:53 – 12:23
- चर(सामान्य)12:23 – 13:52
- लाभ(शुभ)13:52 – 15:22
- अमृत(शुभ)15:22 – 16:51
- काल(वर्जित (परंपरा))16:51 – 18:20
रात
- लाभ(शुभ)18:20 – 19:51
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:51 – 21:22
- शुभ(शुभ)21:22 – 22:52
- अमृत(शुभ)22:52 – 00:23 (5 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)00:23 (5 अक्टू॰) – 01:53 (5 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))01:53 (5 अक्टू॰) – 03:24 (5 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:24 (5 अक्टू॰) – 04:55 (5 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)04:55 (5 अक्टू॰) – 06:25 (5 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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