पंचांग 23 मार्च 2014

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

23 मार्च 2014 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:36
सूर्यास्त18:46
चंद्रोदय00:55 (24 मार्च)
चंद्रास्त11:30
मास:
फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1935 · विक्रम (चैत्रादि) 2070
संवत्सर:
विजय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
वृश्चिक 15:19 तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 20:12 तक, फिर कृष्ण अष्टमी 18:14 (24 मार्च) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 15:19 तक, फिर मूल 14:10 (24 मार्च) तक
योग
सिद्धि 06:46 तक, फिर व्यतीपात 04:14 (24 मार्च) तक, फिर वरीयान 01:24 (25 मार्च) तक
करण
विष्टि 09:02 तक, फिर बव 20:12 तक, फिर बालव 07:16 (24 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:17 – 13:05
  • राहु काल17:14 – 18:46
  • यमगंड12:41 – 14:12
  • गुलिक काल15:43 – 17:14

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:36 – 08:07
  • चर(सामान्य)08:07 – 09:38
  • लाभ(शुभ)09:38 – 11:10
  • अमृत(शुभ)11:10 – 12:41
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:41 – 14:12
  • शुभ(शुभ)14:12 – 15:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:14
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:14 – 18:46

रात

  • शुभ(शुभ)18:46 – 20:14
  • अमृत(शुभ)20:14 – 21:43
  • चर(सामान्य)21:43 – 23:12
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:12 – 00:40 (24 मार्च)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:40 (24 मार्च) – 02:09 (24 मार्च)
  • लाभ(शुभ)02:09 (24 मार्च) – 03:38 (24 मार्च)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:38 (24 मार्च) – 05:07 (24 मार्च)
  • शुभ(शुभ)05:07 (24 मार्च) – 06:35 (24 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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