पंचांग 20 अगस्त 2013

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

20 अगस्त 2013 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:17
सूर्यास्त18:58
चंद्रोदय18:16
चंद्रास्तनहीं
मास:
श्रावण (अमांत)
संवत:
शक 1935 · विक्रम (चैत्रादि) 2070
संवत्सर:
विजय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
मकर 00:29 (21 अग॰) तक, फिर कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 10:21 तक, फिर शुक्ल पूर्णिमा 07:14 (21 अग॰) तक
नक्षत्र
श्रवण 13:39 तक, फिर धनिष्ठा 11:24 (21 अग॰) तक
योग
सौभाग्य 08:27 तक, फिर शोभन 04:47 (21 अग॰) तक, फिर अतिगण्ड 01:24 (22 अग॰) तक
करण
वणिज 10:21 तक, फिर विष्टि 20:46 तक, फिर बव 07:14 (21 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:03
  • राहु काल15:47 – 17:23
  • यमगंड09:27 – 11:02
  • गुलिक काल12:37 – 14:12

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:17 – 07:52
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:52 – 09:27
  • चर(सामान्य)09:27 – 11:02
  • लाभ(शुभ)11:02 – 12:37
  • अमृत(शुभ)12:37 – 14:12
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:12 – 15:47
  • शुभ(शुभ)15:47 – 17:23
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:23 – 18:58

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:58 – 20:23
  • लाभ(शुभ)20:23 – 21:48
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:48 – 23:12
  • शुभ(शुभ)23:12 – 00:37 (21 अग॰)
  • अमृत(शुभ)00:37 (21 अग॰) – 02:02 (21 अग॰)
  • चर(सामान्य)02:02 (21 अग॰) – 03:27 (21 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:27 (21 अग॰) – 04:52 (21 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:52 (21 अग॰) – 06:17 (21 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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