पंचांग 30 नवंबर 2012

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

30 नवंबर 2012 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:50
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय19:26
चंद्रास्त08:01
मास:
कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1934 · विक्रम (चैत्रादि) 2069
संवत्सर:
नंदन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
वृषभ 07:20 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 01:32 (1 दिस॰) तक, फिर कृष्ण तृतीया 03:54 (2 दिस॰) तक
नक्षत्र
मृगशीर्ष 20:50 तक, फिर आर्द्रा 23:42 (1 दिस॰) तक
योग
साध्य 00:20 (1 दिस॰) तक, फिर शुभ 01:04 (2 दिस॰) तक
करण
तैतिल 12:16 तक, फिर गर 01:32 (1 दिस॰) तक, फिर वणिज 14:45 (1 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:01 – 12:45
  • राहु काल10:59 – 12:23
  • यमगंड15:09 – 16:33
  • गुलिक काल08:13 – 09:36

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:50 – 08:13
  • लाभ(शुभ)08:13 – 09:36
  • अमृत(शुभ)09:36 – 10:59
  • काल(वर्जित (परंपरा))10:59 – 12:23
  • शुभ(शुभ)12:23 – 13:46
  • रोग(वर्जित (परंपरा))13:46 – 15:09
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:09 – 16:33
  • चर(सामान्य)16:33 – 17:56

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:56 – 19:33
  • काल(वर्जित (परंपरा))19:33 – 21:10
  • लाभ(शुभ)21:10 – 22:46
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:46 – 00:23 (1 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)00:23 (1 दिस॰) – 02:00 (1 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)02:00 (1 दिस॰) – 03:37 (1 दिस॰)
  • चर(सामान्य)03:37 (1 दिस॰) – 05:13 (1 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:13 (1 दिस॰) – 06:50 (1 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें