पंचांग 25 जुलाई 2012
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
25 जुलाई 2012 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:09
सूर्यास्त19:12
चंद्रोदय11:37
चंद्रास्त23:29
- मास:
- श्रावण (अमांत)
- संवत:
- शक 1934 · विक्रम (चैत्रादि) 2069
- संवत्सर:
- नंदन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कर्क
- चंद्र राशि:
- कन्या 21:46 तक, फिर तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल सप्तमी 03:26 (26 जुल॰) तक, फिर शुक्ल अष्टमी 01:23 (27 जुल॰) तक
- नक्षत्र
- हस्त 10:18 तक, फिर चित्रा 09:11 (26 जुल॰) तक
- योग
- सिद्ध 23:15 तक, फिर साध्य 20:34 (26 जुल॰) तक
- करण
- गर 16:23 तक, फिर वणिज 03:26 (26 जुल॰) तक, फिर विष्टि 14:26 (26 जुल॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:07परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:41 – 14:18
- यमगंड07:47 – 09:25
- गुलिक काल11:03 – 12:41
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:09 – 07:47
- अमृत(शुभ)07:47 – 09:25
- काल(वर्जित (परंपरा))09:25 – 11:03
- शुभ(शुभ)11:03 – 12:41
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:41 – 14:18
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:18 – 15:56
- चर(सामान्य)15:56 – 17:34
- लाभ(शुभ)17:34 – 19:12
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:12 – 20:34
- शुभ(शुभ)20:34 – 21:56
- अमृत(शुभ)21:56 – 23:18
- चर(सामान्य)23:18 – 00:41 (26 जुल॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:41 (26 जुल॰) – 02:03 (26 जुल॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:03 (26 जुल॰) – 03:25 (26 जुल॰)
- लाभ(शुभ)03:25 (26 जुल॰) – 04:48 (26 जुल॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:48 (26 जुल॰) – 06:10 (26 जुल॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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