पंचांग 5 अप्रैल 2012
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
5 अप्रैल 2012 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:25
सूर्यास्त18:49
चंद्रोदय17:27
चंद्रास्त05:39 (6 अप्रैल)
- मास:
- चैत्र (अमांत)
- संवत:
- शक 1934 · विक्रम (चैत्रादि) 2069
- संवत्सर:
- नंदन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- सिंह 11:22 तक, फिर कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- शुक्ल त्रयोदशी 07:34 तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 04:20 (6 अप्रैल) तक, फिर शुक्ल पूर्णिमा 00:48 (7 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- उत्तराफाल्गुनी 03:31 (6 अप्रैल) तक, फिर हस्त 00:46 (7 अप्रैल) तक
- योग
- वृद्धि 18:44 तक, फिर ध्रुव 14:47 (6 अप्रैल) तक
- करण
- तैतिल 07:34 तक, फिर गर 18:00 तक, फिर वणिज 04:20 (6 अप्रैल) तक, फिर विष्टि 14:36 (6 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:02
- राहु काल14:10 – 15:43
- यमगंड06:25 – 07:58
- गुलिक काल09:31 – 11:04
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)06:25 – 07:58
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:58 – 09:31
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:31 – 11:04
- चर(सामान्य)11:04 – 12:37
- लाभ(शुभ)12:37 – 14:10
- अमृत(शुभ)14:10 – 15:43
- काल(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:16
- शुभ(शुभ)17:16 – 18:49
रात
- अमृत(शुभ)18:49 – 20:16
- चर(सामान्य)20:16 – 21:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:09
- काल(वर्जित (परंपरा))23:09 – 00:36 (6 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)00:36 (6 अप्रैल) – 02:03 (6 अप्रैल)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:03 (6 अप्रैल) – 03:30 (6 अप्रैल)
- शुभ(शुभ)03:30 (6 अप्रैल) – 04:57 (6 अप्रैल)
- अमृत(शुभ)04:57 (6 अप्रैल) – 06:24 (6 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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