पंचांग 22 दिसंबर 2011

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

22 दिसंबर 2011 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:02
सूर्यास्त18:03
चंद्रोदय05:22 (23 दिस॰)
चंद्रास्त15:46
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1933 · विक्रम (चैत्रादि) 2068
संवत्सर:
खर (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
तुला 07:43 तक, फिर वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 07:25 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 04:39 (23 दिस॰) तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 02:01 (24 दिस॰) तक
नक्षत्र
विशाखा 13:12 तक, फिर अनुराधा 11:10 (23 दिस॰) तक
योग
धृति 00:23 (23 दिस॰) तक, फिर शूल 20:58 (23 दिस॰) तक
करण
तैतिल 07:25 तक, फिर गर 18:02 तक, फिर वणिज 04:39 (23 दिस॰) तक, फिर विष्टि 15:19 (23 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:10 – 12:54
  • राहु काल13:55 – 15:18
  • यमगंड07:02 – 08:24
  • गुलिक काल09:47 – 11:10

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)07:02 – 08:24
  • रोग(वर्जित (परंपरा))08:24 – 09:47
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:47 – 11:10
  • चर(सामान्य)11:10 – 12:32
  • लाभ(शुभ)12:32 – 13:55
  • अमृत(शुभ)13:55 – 15:18
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:18 – 16:40
  • शुभ(शुभ)16:40 – 18:03

रात

  • अमृत(शुभ)18:03 – 19:40
  • चर(सामान्य)19:40 – 21:18
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:18 – 22:55
  • काल(वर्जित (परंपरा))22:55 – 00:33 (23 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)00:33 (23 दिस॰) – 02:10 (23 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:10 (23 दिस॰) – 03:47 (23 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)03:47 (23 दिस॰) – 05:25 (23 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)05:25 (23 दिस॰) – 07:02 (23 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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