पंचांग 23 नवंबर 2011
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
23 नवंबर 2011 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:45
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय05:32 (24 नव॰)
चंद्रास्त16:10
- मास:
- कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1933 · विक्रम (चैत्रादि) 2068
- संवत्सर:
- खर (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण त्रयोदशी 18:28 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 15:01 (24 नव॰) तक
- नक्षत्र
- चित्रा 08:35 तक, फिर स्वाती 05:53 (24 नव॰) तक, फिर विशाखा 03:12 (25 नव॰) तक
- योग
- सौभाग्य 23:54 तक, फिर शोभन 19:51 (24 नव॰) तक
- करण
- गर 08:10 तक, फिर वणिज 18:28 तक, फिर विष्टि 04:44 (24 नव॰) तक, फिर शकुनि 15:01 (24 नव॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:58 – 12:43परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:20 – 13:44
- यमगंड08:09 – 09:33
- गुलिक काल10:56 – 12:20
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:45 – 08:09
- अमृत(शुभ)08:09 – 09:33
- काल(वर्जित (परंपरा))09:33 – 10:56
- शुभ(शुभ)10:56 – 12:20
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:20 – 13:44
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:44 – 15:08
- चर(सामान्य)15:08 – 16:32
- लाभ(शुभ)16:32 – 17:56
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:56 – 19:32
- शुभ(शुभ)19:32 – 21:08
- अमृत(शुभ)21:08 – 22:44
- चर(सामान्य)22:44 – 00:21 (24 नव॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:21 (24 नव॰) – 01:57 (24 नव॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:57 (24 नव॰) – 03:33 (24 नव॰)
- लाभ(शुभ)03:33 (24 नव॰) – 05:09 (24 नव॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:09 (24 नव॰) – 06:45 (24 नव॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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