पंचांग 30 अक्टूबर 2011

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

30 अक्टूबर 2011 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:33
सूर्यास्त18:03
चंद्रोदय10:03
चंद्रास्त21:26
मास:
कार्तिक (अमांत)
संवत:
शक 1933 · विक्रम (चैत्रादि) 2068
संवत्सर:
खर (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
वृश्चिक 11:57 तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 12:47 तक, फिर शुक्ल पंचमी 11:03 (31 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 11:57 तक, फिर मूल 10:54 (31 अक्टू॰) तक
योग
अतिगण्ड 23:59 तक, फिर सुकर्मा 21:43 (31 अक्टू॰) तक
करण
विष्टि 12:47 तक, फिर बव 23:49 तक, फिर बालव 11:03 (31 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
  • राहु काल16:36 – 18:03
  • यमगंड12:18 – 13:44
  • गुलिक काल15:10 – 16:36

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:33 – 07:59
  • चर(सामान्य)07:59 – 09:25
  • लाभ(शुभ)09:25 – 10:51
  • अमृत(शुभ)10:51 – 12:18
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:44
  • शुभ(शुभ)13:44 – 15:10
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:10 – 16:36
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:36 – 18:03

रात

  • शुभ(शुभ)18:03 – 19:36
  • अमृत(शुभ)19:36 – 21:10
  • चर(सामान्य)21:10 – 22:44
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:44 – 00:18 (31 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:18 (31 अक्टू॰) – 01:52 (31 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)01:52 (31 अक्टू॰) – 03:25 (31 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:25 (31 अक्टू॰) – 04:59 (31 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)04:59 (31 अक्टू॰) – 06:33 (31 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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