पंचांग 25 अक्टूबर 2011
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
25 अक्टूबर 2011 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:31
सूर्यास्त18:05
चंद्रोदय05:44 (26 अक्टू॰)
चंद्रास्त16:45
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1933 · विक्रम (चैत्रादि) 2068
- संवत्सर:
- खर (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण त्रयोदशी 09:02 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 05:16 (26 अक्टू॰) तक, फिर कृष्ण अमावस्या 01:25 (27 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- हस्त 00:47 (26 अक्टू॰) तक, फिर चित्रा 21:43 (26 अक्टू॰) तक
- योग
- वैधृति 22:49 तक, फिर विष्कम्भ 18:28 (26 अक्टू॰) तक
- करण
- वणिज 09:02 तक, फिर विष्टि 19:10 तक, फिर शकुनि 05:16 (26 अक्टू॰) तक, फिर चतुष्पद 15:21 (26 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
- राहु काल15:12 – 16:39
- यमगंड09:24 – 10:51
- गुलिक काल12:18 – 13:45
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:31 – 07:58
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:58 – 09:24
- चर(सामान्य)09:24 – 10:51
- लाभ(शुभ)10:51 – 12:18
- अमृत(शुभ)12:18 – 13:45
- काल(वर्जित (परंपरा))13:45 – 15:12
- शुभ(शुभ)15:12 – 16:39
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:39 – 18:05
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:05 – 19:39
- लाभ(शुभ)19:39 – 21:12
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:12 – 22:45
- शुभ(शुभ)22:45 – 00:18 (26 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)00:18 (26 अक्टू॰) – 01:51 (26 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)01:51 (26 अक्टू॰) – 03:25 (26 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:25 (26 अक्टू॰) – 04:58 (26 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:58 (26 अक्टू॰) – 06:31 (26 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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