पंचांग 29 सितंबर 2011

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

29 सितंबर 2011 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:24
सूर्यास्त18:25
चंद्रोदय08:08
चंद्रास्त19:50
मास:
आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1933 · विक्रम (चैत्रादि) 2068
संवत्सर:
खर (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 09:02 तक, फिर शुक्ल तृतीया 05:33 (30 सित॰) तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 02:30 (1 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
चित्रा 10:40 तक, फिर स्वाती 08:01 (30 सित॰) तक
योग
इन्द्र 08:09 तक, फिर वैधृति 04:07 (30 सित॰) तक, फिर विष्कम्भ 00:27 (1 अक्टू॰) तक
करण
कौलव 09:02 तक, फिर तैतिल 19:15 तक, फिर गर 05:33 (30 सित॰) तक, फिर वणिज 15:57 (30 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:00 – 12:48
  • राहु काल13:55 – 15:25
  • यमगंड06:24 – 07:54
  • गुलिक काल09:24 – 10:54

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:24 – 07:54
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:24
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:54
  • चर(सामान्य)10:54 – 12:24
  • लाभ(शुभ)12:24 – 13:55
  • अमृत(शुभ)13:55 – 15:25
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:25 – 16:55
  • शुभ(शुभ)16:55 – 18:25

रात

  • अमृत(शुभ)18:25 – 19:55
  • चर(सामान्य)19:55 – 21:25
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:25 – 22:55
  • काल(वर्जित (परंपरा))22:55 – 00:25 (30 सित॰)
  • लाभ(शुभ)00:25 (30 सित॰) – 01:54 (30 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:54 (30 सित॰) – 03:24 (30 सित॰)
  • शुभ(शुभ)03:24 (30 सित॰) – 04:54 (30 सित॰)
  • अमृत(शुभ)04:54 (30 सित॰) – 06:24 (30 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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