पंचांग 13 अप्रैल 2011

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

13 अप्रैल 2011 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:19
सूर्यास्त18:50
चंद्रोदय14:06
चंद्रास्त03:00 (14 अप्रैल)
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1933 · विक्रम (चैत्रादि) 2068
संवत्सर:
खर (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
कर्क 02:15 (14 अप्रैल) तक, फिर सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल दशमी 01:28 (14 अप्रैल) तक, फिर शुक्ल एकादशी 22:41 (14 अप्रैल) तक
नक्षत्र
आश्लेषा 02:15 (14 अप्रैल) तक, फिर मघा 00:12 (15 अप्रैल) तक
योग
शूल 02:56 (14 अप्रैल) तक, फिर गण्ड 23:30 (14 अप्रैल) तक
करण
तैतिल 14:38 तक, फिर गर 01:28 (14 अप्रैल) तक, फिर वणिज 12:09 (14 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:10 – 13:00परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:35 – 14:09
  • यमगंड07:53 – 09:27
  • गुलिक काल11:01 – 12:35

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:19 – 07:53
  • अमृत(शुभ)07:53 – 09:27
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:01
  • शुभ(शुभ)11:01 – 12:35
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:35 – 14:09
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:09 – 15:43
  • चर(सामान्य)15:43 – 17:17
  • लाभ(शुभ)17:17 – 18:50

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:50 – 20:16
  • शुभ(शुभ)20:16 – 21:42
  • अमृत(शुभ)21:42 – 23:08
  • चर(सामान्य)23:08 – 00:34 (14 अप्रैल)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:34 (14 अप्रैल) – 02:01 (14 अप्रैल)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:01 (14 अप्रैल) – 03:27 (14 अप्रैल)
  • लाभ(शुभ)03:27 (14 अप्रैल) – 04:53 (14 अप्रैल)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:53 (14 अप्रैल) – 06:19 (14 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें