पंचांग 19 जनवरी 2011

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

19 जनवरी 2011 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:20
चंद्रोदय17:56
चंद्रास्तनहीं
मास:
पौष (अमांत)
संवत:
शक 1932 · विक्रम (चैत्रादि) 2067
संवत्सर:
विकृति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
मिथुन 17:50 तक, फिर कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल पूर्णिमा 02:51 (20 जन॰) तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 00:01 (21 जन॰) तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 23:22 तक, फिर पुष्य 21:18 (20 जन॰) तक
योग
वैधृति 09:57 तक, फिर विष्कम्भ 06:39 (20 जन॰) तक, फिर प्रीति 03:04 (21 जन॰) तक
करण
विष्टि 16:08 तक, फिर बव 02:51 (20 जन॰) तक, फिर बालव 13:28 (20 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:22 – 13:07परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:45 – 14:09
  • यमगंड08:33 – 09:57
  • गुलिक काल11:21 – 12:45

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)07:09 – 08:33
  • अमृत(शुभ)08:33 – 09:57
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:57 – 11:21
  • शुभ(शुभ)11:21 – 12:45
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:45 – 14:09
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:09 – 15:32
  • चर(सामान्य)15:32 – 16:56
  • लाभ(शुभ)16:56 – 18:20

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:20 – 19:56
  • शुभ(शुभ)19:56 – 21:32
  • अमृत(शुभ)21:32 – 23:09
  • चर(सामान्य)23:09 – 00:45 (20 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:45 (20 जन॰) – 02:21 (20 जन॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:21 (20 जन॰) – 03:57 (20 जन॰)
  • लाभ(शुभ)03:57 (20 जन॰) – 05:33 (20 जन॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:33 (20 जन॰) – 07:09 (20 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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