पंचांग 5 अक्टूबर 2010
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
5 अक्टूबर 2010 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:25
सूर्यास्त18:20
चंद्रोदय04:40 (6 अक्टू॰)
चंद्रास्त16:19
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1932 · विक्रम (चैत्रादि) 2067
- संवत्सर:
- विकृति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- सिंह
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण द्वादशी 10:57 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 07:27 (6 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- मघा 13:19 तक, फिर पूर्वाफाल्गुनी 10:34 (6 अक्टू॰) तक
- योग
- शुभ 21:22 तक, फिर शुक्ल 17:16 (6 अक्टू॰) तक
- करण
- तैतिल 10:57 तक, फिर गर 21:14 तक, फिर वणिज 07:27 (6 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:59 – 12:46
- राहु काल15:21 – 16:50
- यमगंड09:24 – 10:53
- गुलिक काल12:22 – 13:52
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:25 – 07:55
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:55 – 09:24
- चर(सामान्य)09:24 – 10:53
- लाभ(शुभ)10:53 – 12:22
- अमृत(शुभ)12:22 – 13:52
- काल(वर्जित (परंपरा))13:52 – 15:21
- शुभ(शुभ)15:21 – 16:50
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:50 – 18:20
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:20 – 19:50
- लाभ(शुभ)19:50 – 21:21
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:21 – 22:52
- शुभ(शुभ)22:52 – 00:23 (6 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)00:23 (6 अक्टू॰) – 01:53 (6 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)01:53 (6 अक्टू॰) – 03:24 (6 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:24 (6 अक्टू॰) – 04:55 (6 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:55 (6 अक्टू॰) – 06:26 (6 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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