पंचांग 17 सितंबर 2010
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
17 सितंबर 2010 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:35
चंद्रोदय14:41
चंद्रास्त02:04 (18 सित॰)
- मास:
- भाद्रपद (अमांत)
- संवत:
- शक 1932 · विक्रम (चैत्रादि) 2067
- संवत्सर:
- विकृति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- धनु 01:05 (18 सित॰) तक, फिर मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- शुक्ल दशमी 02:49 (18 सित॰) तक, फिर शुक्ल एकादशी 05:04 (19 सित॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढ़ा 18:27 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 21:08 (18 सित॰) तक
- योग
- सौभाग्य 11:22 तक, फिर शोभन 11:57 (18 सित॰) तक
- करण
- तैतिल 13:50 तक, फिर गर 02:49 (18 सित॰) तक, फिर वणिज 15:54 (18 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:04 – 12:53
- राहु काल10:57 – 12:29
- यमगंड15:32 – 17:03
- गुलिक काल07:54 – 09:25
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:22 – 07:54
- लाभ(शुभ)07:54 – 09:25
- अमृत(शुभ)09:25 – 10:57
- काल(वर्जित (परंपरा))10:57 – 12:29
- शुभ(शुभ)12:29 – 14:00
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:00 – 15:32
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:32 – 17:03
- चर(सामान्य)17:03 – 18:35
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:35 – 20:03
- काल(वर्जित (परंपरा))20:03 – 21:32
- लाभ(शुभ)21:32 – 23:00
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:00 – 00:29 (18 सित॰)
- शुभ(शुभ)00:29 (18 सित॰) – 01:57 (18 सित॰)
- अमृत(शुभ)01:57 (18 सित॰) – 03:25 (18 सित॰)
- चर(सामान्य)03:25 (18 सित॰) – 04:54 (18 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:54 (18 सित॰) – 06:22 (18 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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