पंचांग 16 जून 2010
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
16 जून 2010 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय05:58
सूर्यास्त19:12
चंद्रोदय09:44
चंद्रास्त22:43
- मास:
- ज्येष्ठ (अमांत)
- संवत:
- शक 1932 · विक्रम (चैत्रादि) 2067
- संवत्सर:
- विकृति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मिथुन
- चंद्र राशि:
- कर्क 01:12 (17 जून) तक, फिर सिंह
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल चतुर्थी 06:37 तक, फिर शुक्ल पंचमी 03:57 (17 जून) तक, फिर शुक्ल षष्ठी 01:25 (18 जून) तक
- नक्षत्र
- आश्लेषा 01:12 (17 जून) तक, फिर मघा 23:26 (17 जून) तक
- योग
- व्याघात 12:25 तक, फिर हर्षण 09:11 (17 जून) तक
- करण
- विष्टि 06:37 तक, फिर बव 17:17 तक, फिर बालव 03:57 (17 जून) तक, फिर कौलव 14:40 (17 जून) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:08 – 13:01परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:35 – 14:14
- यमगंड07:37 – 09:16
- गुलिक काल10:55 – 12:35
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)05:58 – 07:37
- अमृत(शुभ)07:37 – 09:16
- काल(वर्जित (परंपरा))09:16 – 10:55
- शुभ(शुभ)10:55 – 12:35
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:35 – 14:14
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:14 – 15:53
- चर(सामान्य)15:53 – 17:33
- लाभ(शुभ)17:33 – 19:12
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:12 – 20:33
- शुभ(शुभ)20:33 – 21:53
- अमृत(शुभ)21:53 – 23:14
- चर(सामान्य)23:14 – 00:35 (17 जून)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:35 (17 जून) – 01:56 (17 जून)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:56 (17 जून) – 03:16 (17 जून)
- लाभ(शुभ)03:16 (17 जून) – 04:37 (17 जून)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:37 (17 जून) – 05:58 (17 जून)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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