पंचांग 17 फ़रवरी 2010
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
17 फ़रवरी 2010 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:01
सूर्यास्त18:35
चंद्रोदय08:37
चंद्रास्त21:14
- मास:
- फाल्गुन (अमांत)
- संवत:
- शक 1931 · विक्रम (चैत्रादि) 2066
- संवत्सर:
- विरोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल तृतीया 15:07 तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 16:42 (18 फ़र॰) तक
- नक्षत्र
- उत्तरभाद्रपदा 03:01 (18 फ़र॰) तक, फिर रेवती 04:55 (19 फ़र॰) तक
- योग
- साध्य 05:49 (18 फ़र॰) तक, फिर शुभ 05:45 (19 फ़र॰) तक
- करण
- गर 15:07 तक, फिर वणिज 03:58 (18 फ़र॰) तक, फिर विष्टि 16:42 (18 फ़र॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:48 – 14:15
- यमगंड08:28 – 09:55
- गुलिक काल11:21 – 12:48
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)07:01 – 08:28
- अमृत(शुभ)08:28 – 09:55
- काल(वर्जित (परंपरा))09:55 – 11:21
- शुभ(शुभ)11:21 – 12:48
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:48 – 14:15
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:42
- चर(सामान्य)15:42 – 17:09
- लाभ(शुभ)17:09 – 18:35
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:35 – 20:09
- शुभ(शुभ)20:09 – 21:42
- अमृत(शुभ)21:42 – 23:15
- चर(सामान्य)23:15 – 00:48 (18 फ़र॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:48 (18 फ़र॰) – 02:21 (18 फ़र॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:21 (18 फ़र॰) – 03:54 (18 फ़र॰)
- लाभ(शुभ)03:54 (18 फ़र॰) – 05:27 (18 फ़र॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:27 (18 फ़र॰) – 07:00 (18 फ़र॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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