पंचांग 9 सितंबर 2009
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
9 सितंबर 2009 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:42
चंद्रोदय21:39
चंद्रास्त10:11
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1931 · विक्रम (चैत्रादि) 2066
- संवत्सर:
- विरोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण पंचमी 22:55 तक, फिर कृष्ण षष्ठी 21:56 (10 सित॰) तक
- नक्षत्र
- भरणी 05:11 (10 सित॰) तक, फिर कृत्तिका 04:49 (11 सित॰) तक
- योग
- ध्रुव 12:17 तक, फिर व्याघात 10:35 (10 सित॰) तक
- करण
- कौलव 11:15 तक, फिर तैतिल 22:55 तक, फिर गर 10:29 (10 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:56परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:31 – 14:04
- यमगंड07:53 – 09:26
- गुलिक काल10:59 – 12:31
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:21 – 07:53
- अमृत(शुभ)07:53 – 09:26
- काल(वर्जित (परंपरा))09:26 – 10:59
- शुभ(शुभ)10:59 – 12:31
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:31 – 14:04
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:04 – 15:36
- चर(सामान्य)15:36 – 17:09
- लाभ(शुभ)17:09 – 18:42
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:42 – 20:09
- शुभ(शुभ)20:09 – 21:37
- अमृत(शुभ)21:37 – 23:04
- चर(सामान्य)23:04 – 00:31 (10 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:31 (10 सित॰) – 01:59 (10 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:59 (10 सित॰) – 03:26 (10 सित॰)
- लाभ(शुभ)03:26 (10 सित॰) – 04:54 (10 सित॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:54 (10 सित॰) – 06:21 (10 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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