पंचांग 19 अगस्त 2009

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

19 अगस्त 2009 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:17
सूर्यास्त18:58
चंद्रोदय05:57 (20 अग॰)
चंद्रास्त18:07
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1931 · विक्रम (चैत्रादि) 2066
संवत्सर:
विरोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 18:58 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 15:31 (20 अग॰) तक
नक्षत्र
पुष्य 12:31 तक, फिर आश्लेषा 09:51 (20 अग॰) तक
योग
व्यतीपात 08:50 तक, फिर वरीयान 04:53 (20 अग॰) तक, फिर परिघ 01:01 (21 अग॰) तक
करण
विष्टि 08:43 तक, फिर शकुनि 18:58 तक, फिर चतुष्पद 05:14 (20 अग॰) तक, फिर नाग 15:31 (20 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:03परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:38 – 14:13
  • यमगंड07:52 – 09:27
  • गुलिक काल11:02 – 12:38

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:17 – 07:52
  • अमृत(शुभ)07:52 – 09:27
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:02
  • शुभ(शुभ)11:02 – 12:38
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:13
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:13 – 15:48
  • चर(सामान्य)15:48 – 17:23
  • लाभ(शुभ)17:23 – 18:58

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:58 – 20:23
  • शुभ(शुभ)20:23 – 21:48
  • अमृत(शुभ)21:48 – 23:13
  • चर(सामान्य)23:13 – 00:38 (20 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:38 (20 अग॰) – 02:03 (20 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:03 (20 अग॰) – 03:27 (20 अग॰)
  • लाभ(शुभ)03:27 (20 अग॰) – 04:52 (20 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:52 (20 अग॰) – 06:17 (20 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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