पंचांग 12 जुलाई 2009

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

12 जुलाई 2009 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:05
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय22:25
चंद्रास्त09:58
मास:
आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1931 · विक्रम (चैत्रादि) 2066
संवत्सर:
विरोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 01:59 (13 जुल॰) तक, फिर कृष्ण षष्ठी 03:03 (14 जुल॰) तक
नक्षत्र
शतभिषा 13:01 तक, फिर पूर्वभाद्रपदा 15:01 (13 जुल॰) तक
योग
सौभाग्य 02:10 (13 जुल॰) तक, फिर शोभन 02:04 (14 जुल॰) तक
करण
कौलव 13:14 तक, फिर तैतिल 01:59 (13 जुल॰) तक, फिर गर 14:36 (13 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:06
  • राहु काल17:36 – 19:14
  • यमगंड12:40 – 14:18
  • गुलिक काल15:57 – 17:36

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:05 – 07:43
  • चर(सामान्य)07:43 – 09:22
  • लाभ(शुभ)09:22 – 11:01
  • अमृत(शुभ)11:01 – 12:40
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:40 – 14:18
  • शुभ(शुभ)14:18 – 15:57
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:57 – 17:36
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:36 – 19:14

रात

  • शुभ(शुभ)19:14 – 20:36
  • अमृत(शुभ)20:36 – 21:57
  • चर(सामान्य)21:57 – 23:18
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:18 – 00:40 (13 जुल॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:40 (13 जुल॰) – 02:01 (13 जुल॰)
  • लाभ(शुभ)02:01 (13 जुल॰) – 03:22 (13 जुल॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:22 (13 जुल॰) – 04:44 (13 जुल॰)
  • शुभ(शुभ)04:44 (13 जुल॰) – 06:05 (13 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

अपनी कुंडली देखें