पंचांग 24 जून 2009
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
24 जून 2009 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय05:59
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय07:23
चंद्रास्त20:55
- मास:
- आषाढ़ (अमांत)
- संवत:
- शक 1931 · विक्रम (चैत्रादि) 2066
- संवत्सर:
- विरोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मिथुन
- चंद्र राशि:
- मिथुन 12:44 तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल द्वितीया 17:44 तक, फिर शुक्ल तृतीया 14:19 (25 जून) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 18:03 तक, फिर पुष्य 15:29 (25 जून) तक
- योग
- ध्रुव 14:21 तक, फिर व्याघात 10:26 (25 जून) तक
- करण
- बालव 07:32 तक, फिर कौलव 17:44 तक, फिर तैतिल 03:59 (25 जून) तक, फिर गर 14:19 (25 जून) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:10 – 13:03परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:36 – 14:16
- यमगंड07:39 – 09:18
- गुलिक काल10:57 – 12:36
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)05:59 – 07:39
- अमृत(शुभ)07:39 – 09:18
- काल(वर्जित (परंपरा))09:18 – 10:57
- शुभ(शुभ)10:57 – 12:36
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:36 – 14:16
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:16 – 15:55
- चर(सामान्य)15:55 – 17:34
- लाभ(शुभ)17:34 – 19:14
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:14 – 20:34
- शुभ(शुभ)20:34 – 21:55
- अमृत(शुभ)21:55 – 23:16
- चर(सामान्य)23:16 – 00:37 (25 जून)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:37 (25 जून) – 01:57 (25 जून)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:57 (25 जून) – 03:18 (25 जून)
- लाभ(शुभ)03:18 (25 जून) – 04:39 (25 जून)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:39 (25 जून) – 05:59 (25 जून)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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