पंचांग 25 फ़रवरी 2009
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
25 फ़रवरी 2009 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:56
सूर्यास्त18:39
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त18:58
- मास:
- माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1930 · विक्रम (चैत्रादि) 2065
- संवत्सर:
- सर्वधारी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- कुंभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण अमावस्या 07:05 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 07:38 (26 फ़र॰) तक
- नक्षत्र
- शतभिषा 21:06 तक, फिर पूर्वभाद्रपदा 21:57 (26 फ़र॰) तक
- योग
- शिव 09:41 तक, फिर सिद्ध 08:57 (26 फ़र॰) तक
- करण
- नाग 07:05 तक, फिर किंस्तुघ्न 19:25 तक, फिर बव 07:38 (26 फ़र॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:24 – 13:11परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:47 – 14:15
- यमगंड08:24 – 09:52
- गुलिक काल11:19 – 12:47
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:56 – 08:24
- अमृत(शुभ)08:24 – 09:52
- काल(वर्जित (परंपरा))09:52 – 11:19
- शुभ(शुभ)11:19 – 12:47
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:47 – 14:15
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:43
- चर(सामान्य)15:43 – 17:11
- लाभ(शुभ)17:11 – 18:39
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:39 – 20:11
- शुभ(शुभ)20:11 – 21:43
- अमृत(शुभ)21:43 – 23:15
- चर(सामान्य)23:15 – 00:47 (26 फ़र॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:47 (26 फ़र॰) – 02:19 (26 फ़र॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:19 (26 फ़र॰) – 03:51 (26 फ़र॰)
- लाभ(शुभ)03:51 (26 फ़र॰) – 05:23 (26 फ़र॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:23 (26 फ़र॰) – 06:55 (26 फ़र॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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