पंचांग 19 अगस्त 2008
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
19 अगस्त 2008 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:17
सूर्यास्त18:58
चंद्रोदय20:33
चंद्रास्त08:14
- मास:
- श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1930 · विक्रम (चैत्रादि) 2065
- संवत्सर:
- सर्वधारी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- कुंभ 08:55 तक, फिर मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण तृतीया 01:18 (20 अग॰) तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 00:00 (21 अग॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वभाद्रपदा 14:53 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 14:28 (20 अग॰) तक
- योग
- सुकर्मा 10:14 तक, फिर धृति 08:20 (20 अग॰) तक
- करण
- वणिज 13:49 तक, फिर विष्टि 01:18 (20 अग॰) तक, फिर बव 12:42 (20 अग॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:03
- राहु काल15:48 – 17:23
- यमगंड09:27 – 11:02
- गुलिक काल12:37 – 14:13
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:17 – 07:52
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:52 – 09:27
- चर(सामान्य)09:27 – 11:02
- लाभ(शुभ)11:02 – 12:37
- अमृत(शुभ)12:37 – 14:13
- काल(वर्जित (परंपरा))14:13 – 15:48
- शुभ(शुभ)15:48 – 17:23
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:23 – 18:58
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:58 – 20:23
- लाभ(शुभ)20:23 – 21:48
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:48 – 23:13
- शुभ(शुभ)23:13 – 00:38 (20 अग॰)
- अमृत(शुभ)00:38 (20 अग॰) – 02:02 (20 अग॰)
- चर(सामान्य)02:02 (20 अग॰) – 03:27 (20 अग॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:27 (20 अग॰) – 04:52 (20 अग॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:52 (20 अग॰) – 06:17 (20 अग॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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