पंचांग 8 अक्टूबर 1997

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

8 अक्टूबर 1997 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:26
सूर्यास्त18:17
चंद्रोदय11:51
चंद्रास्त23:23
मास:
आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1919 · विक्रम (चैत्रादि) 2054
संवत्सर:
ईश्वर (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 06:41 तक, फिर शुक्ल सप्तमी 06:17 (9 अक्टू॰) तक, फिर शुक्ल अष्टमी 05:17 (10 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
मूल 01:35 (9 अक्टू॰) तक, फिर पूर्वाषाढ़ा 01:22 (10 अक्टू॰) तक
योग
शोभन 04:14 (9 अक्टू॰) तक, फिर अतिगण्ड 02:22 (10 अक्टू॰) तक
करण
तैतिल 06:41 तक, फिर गर 18:33 तक, फिर वणिज 06:17 (9 अक्टू॰) तक, फिर विष्टि 17:52 (9 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:58 – 12:45परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:22 – 13:50
  • यमगंड07:55 – 09:24
  • गुलिक काल10:53 – 12:22

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:26 – 07:55
  • अमृत(शुभ)07:55 – 09:24
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:53
  • शुभ(शुभ)10:53 – 12:22
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:22 – 13:50
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:50 – 15:19
  • चर(सामान्य)15:19 – 16:48
  • लाभ(शुभ)16:48 – 18:17

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:17 – 19:48
  • शुभ(शुभ)19:48 – 21:19
  • अमृत(शुभ)21:19 – 22:50
  • चर(सामान्य)22:50 – 00:22 (9 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:22 (9 अक्टू॰) – 01:53 (9 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:53 (9 अक्टू॰) – 03:24 (9 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)03:24 (9 अक्टू॰) – 04:55 (9 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:55 (9 अक्टू॰) – 06:26 (9 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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