पंचांग 26 अप्रैल 1997

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

26 अप्रैल 1997 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:10
सूर्यास्त18:54
चंद्रोदय22:11
चंद्रास्त08:51
मास:
चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1919 · विक्रम (चैत्रादि) 2054
संवत्सर:
ईश्वर (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मेष
चंद्र राशि:
वृश्चिक 00:04 (27 अप्रैल) तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 01:28 (27 अप्रैल) तक, फिर कृष्ण पंचमी 00:19 (28 अप्रैल) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 00:04 (27 अप्रैल) तक, फिर मूल 23:38 (27 अप्रैल) तक
योग
परिघ 01:03 (27 अप्रैल) तक, फिर शिव 23:03 (27 अप्रैल) तक
करण
बव 13:55 तक, फिर बालव 01:28 (27 अप्रैल) तक, फिर कौलव 12:56 (27 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:57
  • राहु काल09:21 – 10:56
  • यमगंड14:08 – 15:43
  • गुलिक काल06:10 – 07:45

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:10 – 07:45
  • शुभ(शुभ)07:45 – 09:21
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:21 – 10:56
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:56 – 12:32
  • चर(सामान्य)12:32 – 14:08
  • लाभ(शुभ)14:08 – 15:43
  • अमृत(शुभ)15:43 – 17:19
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:19 – 18:54

रात

  • लाभ(शुभ)18:54 – 20:18
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:18 – 21:43
  • शुभ(शुभ)21:43 – 23:07
  • अमृत(शुभ)23:07 – 00:32 (27 अप्रैल)
  • चर(सामान्य)00:32 (27 अप्रैल) – 01:56 (27 अप्रैल)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))01:56 (27 अप्रैल) – 03:20 (27 अप्रैल)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:20 (27 अप्रैल) – 04:45 (27 अप्रैल)
  • लाभ(शुभ)04:45 (27 अप्रैल) – 06:09 (27 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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