पंचांग 19 मार्च 1997

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

19 मार्च 1997 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:39
सूर्यास्त18:45
चंद्रोदय14:58
चंद्रास्त03:59 (20 मार्च)
मास:
फाल्गुन (अमांत)
संवत:
शक 1918 · विक्रम (चैत्रादि) 2053
संवत्सर:
धाता (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 00:17 (20 मार्च) तक, फिर शुक्ल द्वादशी 02:55 (21 मार्च) तक
नक्षत्र
पुष्य 22:49 तक, फिर आश्लेषा 01:55 (21 मार्च) तक
योग
अतिगण्ड 19:05 तक, फिर सुकर्मा 20:04 (20 मार्च) तक
करण
वणिज 11:02 तक, फिर विष्टि 00:17 (20 मार्च) तक, फिर बव 13:36 (20 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:18 – 13:06परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:42 – 14:13
  • यमगंड08:10 – 09:41
  • गुलिक काल11:11 – 12:42

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:39 – 08:10
  • अमृत(शुभ)08:10 – 09:41
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:41 – 11:11
  • शुभ(शुभ)11:11 – 12:42
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:42 – 14:13
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:13 – 15:43
  • चर(सामान्य)15:43 – 17:14
  • लाभ(शुभ)17:14 – 18:45

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:45 – 20:14
  • शुभ(शुभ)20:14 – 21:43
  • अमृत(शुभ)21:43 – 23:12
  • चर(सामान्य)23:12 – 00:42 (20 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:42 (20 मार्च) – 02:11 (20 मार्च)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:11 (20 मार्च) – 03:40 (20 मार्च)
  • लाभ(शुभ)03:40 (20 मार्च) – 05:09 (20 मार्च)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:09 (20 मार्च) – 06:38 (20 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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