पंचांग 21 अक्टूबर 1996
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
21 अक्टूबर 1996 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:30
सूर्यास्त18:07
चंद्रोदय14:12
चंद्रास्त02:09 (22 अक्टू॰)
- मास:
- आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1918 · विक्रम (चैत्रादि) 2053
- संवत्सर:
- धाता (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- मकर 21:28 तक, फिर कुंभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- शुक्ल नवमी 08:19 तक, फिर शुक्ल दशमी 05:59 (22 अक्टू॰) तक, फिर शुक्ल एकादशी 03:39 (23 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- श्रवण 10:16 तक, फिर धनिष्ठा 08:40 (22 अक्टू॰) तक
- योग
- शूल 14:03 तक, फिर गण्ड 10:59 (22 अक्टू॰) तक
- करण
- कौलव 08:19 तक, फिर तैतिल 19:10 तक, फिर गर 05:59 (22 अक्टू॰) तक, फिर वणिज 16:49 (22 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:42
- राहु काल07:57 – 09:24
- यमगंड10:51 – 12:19
- गुलिक काल13:46 – 15:13
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:30 – 07:57
- काल(वर्जित (परंपरा))07:57 – 09:24
- शुभ(शुभ)09:24 – 10:51
- रोग(वर्जित (परंपरा))10:51 – 12:19
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:19 – 13:46
- चर(सामान्य)13:46 – 15:13
- लाभ(शुभ)15:13 – 16:40
- अमृत(शुभ)16:40 – 18:07
रात
- चर(सामान्य)18:07 – 19:40
- रोग(वर्जित (परंपरा))19:40 – 21:13
- काल(वर्जित (परंपरा))21:13 – 22:46
- लाभ(शुभ)22:46 – 00:19 (22 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:19 (22 अक्टू॰) – 01:52 (22 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)01:52 (22 अक्टू॰) – 03:24 (22 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)03:24 (22 अक्टू॰) – 04:57 (22 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)04:57 (22 अक्टू॰) – 06:30 (22 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
अपनी कुंडली देखें