पंचांग 18 मार्च 1996
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
18 मार्च 1996 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:40
सूर्यास्त18:45
चंद्रोदय06:20 (19 मार्च)
चंद्रास्त17:48
- मास:
- फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1917 · विक्रम (चैत्रादि) 2052
- संवत्सर:
- युवा (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- कुंभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- कृष्ण चतुर्दशी 18:23 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 16:14 (19 मार्च) तक
- नक्षत्र
- शतभिषा 14:20 तक, फिर पूर्वभाद्रपदा 12:52 (19 मार्च) तक
- योग
- साध्य 12:55 तक, फिर शुभ 09:56 (19 मार्च) तक
- करण
- विष्टि 07:34 तक, फिर शकुनि 18:23 तक, फिर चतुष्पद 05:16 (19 मार्च) तक, फिर नाग 16:14 (19 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:18 – 13:06
- राहु काल08:10 – 09:41
- यमगंड11:12 – 12:42
- गुलिक काल14:13 – 15:43
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:40 – 08:10
- काल(वर्जित (परंपरा))08:10 – 09:41
- शुभ(शुभ)09:41 – 11:12
- रोग(वर्जित (परंपरा))11:12 – 12:42
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:42 – 14:13
- चर(सामान्य)14:13 – 15:43
- लाभ(शुभ)15:43 – 17:14
- अमृत(शुभ)17:14 – 18:45
रात
- चर(सामान्य)18:45 – 20:14
- रोग(वर्जित (परंपरा))20:14 – 21:43
- काल(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:13
- लाभ(शुभ)23:13 – 00:42 (19 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:42 (19 मार्च) – 02:11 (19 मार्च)
- शुभ(शुभ)02:11 (19 मार्च) – 03:40 (19 मार्च)
- अमृत(शुभ)03:40 (19 मार्च) – 05:10 (19 मार्च)
- चर(सामान्य)05:10 (19 मार्च) – 06:39 (19 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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