पंचांग 17 दिसंबर 1995
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
17 दिसंबर 1995 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:59
सूर्यास्त18:01
चंद्रोदय02:48 (18 दिस॰)
चंद्रास्त13:55
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1917 · विक्रम (चैत्रादि) 2052
- संवत्सर:
- युवा (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- कन्या 19:48 तक, फिर तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण दशमी 22:23 तक, फिर कृष्ण एकादशी 20:41 (18 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- हस्त 07:58 तक, फिर चित्रा 07:25 (18 दिस॰) तक
- योग
- शोभन 04:26 (18 दिस॰) तक, फिर अतिगण्ड 01:41 (19 दिस॰) तक
- करण
- वणिज 10:55 तक, फिर विष्टि 22:23 तक, फिर बव 09:38 (18 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:52
- राहु काल16:38 – 18:01
- यमगंड12:30 – 13:53
- गुलिक काल15:15 – 16:38
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:59 – 08:22
- चर(सामान्य)08:22 – 09:44
- लाभ(शुभ)09:44 – 11:07
- अमृत(शुभ)11:07 – 12:30
- काल(वर्जित (परंपरा))12:30 – 13:53
- शुभ(शुभ)13:53 – 15:15
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:15 – 16:38
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:38 – 18:01
रात
- शुभ(शुभ)18:01 – 19:38
- अमृत(शुभ)19:38 – 21:15
- चर(सामान्य)21:15 – 22:53
- रोग(वर्जित (परंपरा))22:53 – 00:30 (18 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:30 (18 दिस॰) – 02:08 (18 दिस॰)
- लाभ(शुभ)02:08 (18 दिस॰) – 03:45 (18 दिस॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:45 (18 दिस॰) – 05:22 (18 दिस॰)
- शुभ(शुभ)05:22 (18 दिस॰) – 07:00 (18 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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