पंचांग 9 अगस्त 1995

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

9 अगस्त 1995 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:14
सूर्यास्त19:05
चंद्रोदय17:47
चंद्रास्त05:33 (10 अग॰)
मास:
श्रावण (अमांत)
संवत:
शक 1917 · विक्रम (चैत्रादि) 2052
संवत्सर:
युवा (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
धनु 08:55 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 02:46 (10 अग॰) तक, फिर शुक्ल पूर्णिमा 23:45 (10 अग॰) तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 01:07 (10 अग॰) तक, फिर श्रवण 22:54 (10 अग॰) तक
योग
प्रीति 15:33 तक, फिर आयुष्मान 11:54 (10 अग॰) तक
करण
गर 16:21 तक, फिर वणिज 02:46 (10 अग॰) तक, फिर विष्टि 13:13 (10 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:05परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:40 – 14:16
  • यमगंड07:50 – 09:27
  • गुलिक काल11:03 – 12:40

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:14 – 07:50
  • अमृत(शुभ)07:50 – 09:27
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:03
  • शुभ(शुभ)11:03 – 12:40
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:40 – 14:16
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:16 – 15:52
  • चर(सामान्य)15:52 – 17:29
  • लाभ(शुभ)17:29 – 19:05

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:05 – 20:29
  • शुभ(शुभ)20:29 – 21:52
  • अमृत(शुभ)21:52 – 23:16
  • चर(सामान्य)23:16 – 00:40 (10 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:40 (10 अग॰) – 02:03 (10 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:03 (10 अग॰) – 03:27 (10 अग॰)
  • लाभ(शुभ)03:27 (10 अग॰) – 04:51 (10 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:51 (10 अग॰) – 06:14 (10 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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