पंचांग 25 मार्च 1995

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

25 मार्च 1995 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:35
सूर्यास्त18:46
चंद्रोदय02:53 (26 मार्च)
चंद्रास्त13:40
मास:
फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1916 · विक्रम (चैत्रादि) 2051
संवत्सर:
भाव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
धनु 13:52 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण नवमी 10:56 तक, फिर कृष्ण दशमी 09:27 (26 मार्च) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 08:05 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 07:17 (26 मार्च) तक
योग
परिघ 18:34 तक, फिर शिव 16:19 (26 मार्च) तक
करण
गर 10:56 तक, फिर वणिज 22:09 तक, फिर विष्टि 09:27 (26 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:16 – 13:05
  • राहु काल09:38 – 11:09
  • यमगंड14:12 – 15:43
  • गुलिक काल06:35 – 08:06

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:35 – 08:06
  • शुभ(शुभ)08:06 – 09:38
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:38 – 11:09
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:09 – 12:40
  • चर(सामान्य)12:40 – 14:12
  • लाभ(शुभ)14:12 – 15:43
  • अमृत(शुभ)15:43 – 17:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:15 – 18:46

रात

  • लाभ(शुभ)18:46 – 20:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:15 – 21:43
  • शुभ(शुभ)21:43 – 23:11
  • अमृत(शुभ)23:11 – 00:40 (26 मार्च)
  • चर(सामान्य)00:40 (26 मार्च) – 02:08 (26 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:08 (26 मार्च) – 03:37 (26 मार्च)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:37 (26 मार्च) – 05:05 (26 मार्च)
  • लाभ(शुभ)05:05 (26 मार्च) – 06:34 (26 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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