पंचांग 6 नवंबर 1994
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
6 नवंबर 1994 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:36
सूर्यास्त17:59
चंद्रोदय09:20
चंद्रास्त20:51
- मास:
- कार्तिक (अमांत)
- संवत:
- शक 1916 · विक्रम (चैत्रादि) 2051
- संवत्सर:
- भाव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- वृश्चिक 15:22 तक, फिर धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- शुक्ल तृतीया 08:22 तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 05:23 (7 नव॰) तक, फिर शुक्ल पंचमी 02:55 (8 नव॰) तक
- नक्षत्र
- ज्येष्ठा 15:22 तक, फिर मूल 13:18 (7 नव॰) तक
- योग
- अतिगण्ड 15:25 तक, फिर सुकर्मा 11:55 (7 नव॰) तक
- करण
- गर 08:22 तक, फिर वणिज 18:49 तक, फिर विष्टि 05:23 (7 नव॰) तक, फिर बव 16:04 (7 नव॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:40
- राहु काल16:34 – 17:59
- यमगंड12:18 – 13:43
- गुलिक काल15:08 – 16:34
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:36 – 08:01
- चर(सामान्य)08:01 – 09:27
- लाभ(शुभ)09:27 – 10:52
- अमृत(शुभ)10:52 – 12:18
- काल(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:43
- शुभ(शुभ)13:43 – 15:08
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:08 – 16:34
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:34 – 17:59
रात
- शुभ(शुभ)17:59 – 19:34
- अमृत(शुभ)19:34 – 21:09
- चर(सामान्य)21:09 – 22:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))22:43 – 00:18 (7 नव॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:18 (7 नव॰) – 01:52 (7 नव॰)
- लाभ(शुभ)01:52 (7 नव॰) – 03:27 (7 नव॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:27 (7 नव॰) – 05:02 (7 नव॰)
- शुभ(शुभ)05:02 (7 नव॰) – 06:36 (7 नव॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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