पंचांग 6 अक्टूबर 1994

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

6 अक्टूबर 1994 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:26
सूर्यास्त18:19
चंद्रोदय07:24
चंद्रास्त19:16
मास:
आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1916 · विक्रम (चैत्रादि) 2051
संवत्सर:
भाव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 02:42 (7 अक्टू॰) तक, फिर शुक्ल तृतीया 23:25 (7 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
चित्रा 15:35 तक, फिर स्वाती 13:00 (7 अक्टू॰) तक
योग
वैधृति 21:54 तक, फिर विष्कम्भ 18:01 (7 अक्टू॰) तक
करण
बालव 16:24 तक, फिर कौलव 02:42 (7 अक्टू॰) तक, फिर तैतिल 13:02 (7 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:58 – 12:46
  • राहु काल13:51 – 15:21
  • यमगंड06:26 – 07:55
  • गुलिक काल09:24 – 10:53

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:26 – 07:55
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:55 – 09:24
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:53
  • चर(सामान्य)10:53 – 12:22
  • लाभ(शुभ)12:22 – 13:51
  • अमृत(शुभ)13:51 – 15:21
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:21 – 16:50
  • शुभ(शुभ)16:50 – 18:19

रात

  • अमृत(शुभ)18:19 – 19:50
  • चर(सामान्य)19:50 – 21:21
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:21 – 22:51
  • काल(वर्जित (परंपरा))22:51 – 00:22 (7 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)00:22 (7 अक्टू॰) – 01:53 (7 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:53 (7 अक्टू॰) – 03:24 (7 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)03:24 (7 अक्टू॰) – 04:55 (7 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)04:55 (7 अक्टू॰) – 06:26 (7 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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