पंचांग 5 अगस्त 1994

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

5 अगस्त 1994 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:13
सूर्यास्त19:07
चंद्रोदय05:04 (6 अग॰)
चंद्रास्त17:26
मास:
आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1916 · विक्रम (चैत्रादि) 2051
संवत्सर:
भाव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
मिथुन 00:39 (6 अग॰) तक, फिर कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 15:21 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 15:06 (6 अग॰) तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 06:45 (6 अग॰) तक
योग
वज्र 01:47 (6 अग॰) तक, फिर सिद्धि 00:21 (7 अग॰) तक
करण
वणिज 15:21 तक, फिर विष्टि 03:18 (6 अग॰) तक, फिर शकुनि 15:06 (6 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:06
  • राहु काल11:03 – 12:40
  • यमगंड15:54 – 17:30
  • गुलिक काल07:50 – 09:26

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:13 – 07:50
  • लाभ(शुभ)07:50 – 09:26
  • अमृत(शुभ)09:26 – 11:03
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:03 – 12:40
  • शुभ(शुभ)12:40 – 14:17
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:17 – 15:54
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:54 – 17:30
  • चर(सामान्य)17:30 – 19:07

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:07 – 20:30
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:30 – 21:54
  • लाभ(शुभ)21:54 – 23:17
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:17 – 00:40 (6 अग॰)
  • शुभ(शुभ)00:40 (6 अग॰) – 02:03 (6 अग॰)
  • अमृत(शुभ)02:03 (6 अग॰) – 03:27 (6 अग॰)
  • चर(सामान्य)03:27 (6 अग॰) – 04:50 (6 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:50 (6 अग॰) – 06:13 (6 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

अपनी कुंडली देखें