पंचांग 9 जनवरी 1994

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

9 जनवरी 1994 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:14
चंद्रोदय05:25 (10 जन॰)
चंद्रास्त15:51
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1916 · विक्रम (चैत्रादि) 2051
संवत्सर:
भाव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
वृश्चिक 03:57 (10 जन॰) तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 08:42 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 07:04 (10 जन॰) तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 05:42 (11 जन॰) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 03:57 (10 जन॰) तक, फिर मूल 03:11 (11 जन॰) तक
योग
गण्ड 08:07 तक, फिर वृद्धि 05:34 (10 जन॰) तक, फिर ध्रुव 03:12 (11 जन॰) तक
करण
तैतिल 08:42 तक, फिर गर 19:52 तक, फिर वणिज 07:04 (10 जन॰) तक, फिर विष्टि 18:20 (10 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:19 – 13:03
  • राहु काल16:51 – 18:14
  • यमगंड12:41 – 14:04
  • गुलिक काल15:27 – 16:51

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:09 – 08:32
  • चर(सामान्य)08:32 – 09:55
  • लाभ(शुभ)09:55 – 11:18
  • अमृत(शुभ)11:18 – 12:41
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:41 – 14:04
  • शुभ(शुभ)14:04 – 15:27
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:27 – 16:51
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:51 – 18:14

रात

  • शुभ(शुभ)18:14 – 19:51
  • अमृत(शुभ)19:51 – 21:27
  • चर(सामान्य)21:27 – 23:04
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:04 – 00:41 (10 जन॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:41 (10 जन॰) – 02:18 (10 जन॰)
  • लाभ(शुभ)02:18 (10 जन॰) – 03:55 (10 जन॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:55 (10 जन॰) – 05:32 (10 जन॰)
  • शुभ(शुभ)05:32 (10 जन॰) – 07:09 (10 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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