पंचांग 10 दिसंबर 1993

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

10 दिसंबर 1993 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:55
सूर्यास्त17:58
चंद्रोदय04:35 (11 दिस॰)
चंद्रास्त15:15
मास:
कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1915 · विक्रम (चैत्रादि) 2050
संवत्सर:
श्रीमुख (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 22:28 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 19:47 (11 दिस॰) तक
नक्षत्र
स्वाती 00:19 (11 दिस॰) तक, फिर विशाखा 22:21 (11 दिस॰) तक
योग
शोभन 11:31 तक, फिर अतिगण्ड 08:06 (11 दिस॰) तक
करण
कौलव 11:49 तक, फिर तैतिल 22:28 तक, फिर गर 09:07 (11 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:49
  • राहु काल11:04 – 12:27
  • यमगंड15:12 – 16:35
  • गुलिक काल08:18 – 09:41

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:55 – 08:18
  • लाभ(शुभ)08:18 – 09:41
  • अमृत(शुभ)09:41 – 11:04
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:04 – 12:27
  • शुभ(शुभ)12:27 – 13:50
  • रोग(वर्जित (परंपरा))13:50 – 15:12
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:12 – 16:35
  • चर(सामान्य)16:35 – 17:58

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:58 – 19:35
  • काल(वर्जित (परंपरा))19:35 – 21:13
  • लाभ(शुभ)21:13 – 22:50
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:50 – 00:27 (11 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)00:27 (11 दिस॰) – 02:04 (11 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)02:04 (11 दिस॰) – 03:42 (11 दिस॰)
  • चर(सामान्य)03:42 (11 दिस॰) – 05:19 (11 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:19 (11 दिस॰) – 06:56 (11 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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