पंचांग 10 जनवरी 1993
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
10 जनवरी 1993 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:15
चंद्रोदय20:20
चंद्रास्त08:25
- मास:
- पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1914 · विक्रम (चैत्रादि) 2049
- संवत्सर:
- अंगिरा (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- कर्क 03:45 (11 जन॰) तक, फिर सिंह
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण द्वितीया 12:02 तक, फिर कृष्ण तृतीया 08:51 (11 जन॰) तक
- नक्षत्र
- आश्लेषा 03:45 (11 जन॰) तक, फिर मघा 01:20 (12 जन॰) तक
- योग
- विष्कम्भ 07:12 तक, फिर प्रीति 03:20 (11 जन॰) तक, फिर आयुष्मान 23:32 (11 जन॰) तक
- करण
- गर 12:02 तक, फिर वणिज 22:26 तक, फिर विष्टि 08:51 (11 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:19 – 13:04
- राहु काल16:51 – 18:15
- यमगंड12:42 – 14:05
- गुलिक काल15:28 – 16:51
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:09 – 08:32
- चर(सामान्य)08:32 – 09:55
- लाभ(शुभ)09:55 – 11:18
- अमृत(शुभ)11:18 – 12:42
- काल(वर्जित (परंपरा))12:42 – 14:05
- शुभ(शुभ)14:05 – 15:28
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:28 – 16:51
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:51 – 18:15
रात
- शुभ(शुभ)18:15 – 19:51
- अमृत(शुभ)19:51 – 21:28
- चर(सामान्य)21:28 – 23:05
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:05 – 00:42 (11 जन॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:42 (11 जन॰) – 02:19 (11 जन॰)
- लाभ(शुभ)02:19 (11 जन॰) – 03:55 (11 जन॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:55 (11 जन॰) – 05:32 (11 जन॰)
- शुभ(शुभ)05:32 (11 जन॰) – 07:09 (11 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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