पंचांग 3 जुलाई 1991

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

3 जुलाई 1991 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:02
सूर्यास्त19:15
चंद्रोदय23:20
चंद्रास्त11:00
मास:
ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1913 · विक्रम (चैत्रादि) 2048
संवत्सर:
प्रजापति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
कुंभ 21:16 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 20:12 तक, फिर कृष्ण सप्तमी 20:28 (4 जुल॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाभाद्रपदा 03:34 (4 जुल॰) तक, फिर उत्तराभाद्रपदा 04:18 (5 जुल॰) तक
योग
आयुष्मान 08:01 तक, फिर सौभाग्य 07:32 (4 जुल॰) तक
करण
गर 07:49 तक, फिर वणिज 20:12 तक, फिर विष्टि 08:25 (4 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:05परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:38 – 14:17
  • यमगंड07:41 – 09:20
  • गुलिक काल10:59 – 12:38

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:02 – 07:41
  • अमृत(शुभ)07:41 – 09:20
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:20 – 10:59
  • शुभ(शुभ)10:59 – 12:38
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:17
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:17 – 15:56
  • चर(सामान्य)15:56 – 17:36
  • लाभ(शुभ)17:36 – 19:15

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:15 – 20:36
  • शुभ(शुभ)20:36 – 21:56
  • अमृत(शुभ)21:56 – 23:17
  • चर(सामान्य)23:17 – 00:38 (4 जुल॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:38 (4 जुल॰) – 01:59 (4 जुल॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:59 (4 जुल॰) – 03:20 (4 जुल॰)
  • लाभ(शुभ)03:20 (4 जुल॰) – 04:41 (4 जुल॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:41 (4 जुल॰) – 06:02 (4 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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