पंचांग 3 अक्टूबर 1990
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
3 अक्टूबर 1990 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:25
सूर्यास्त18:21
चंद्रोदय17:25
चंद्रास्त05:59 (4 अक्टू॰)
- मास:
- आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1912 · विक्रम (चैत्रादि) 2047
- संवत्सर:
- प्रमोद (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- कुंभ 12:36 तक, फिर मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल चतुर्दशी 20:02 तक, फिर शुक्ल पूर्णिमा 17:31 (4 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाभाद्रपदा 18:15 तक, फिर उत्तराभाद्रपदा 16:31 (4 अक्टू॰) तक
- योग
- गण्ड 08:12 तक, फिर वृद्धि 05:16 (4 अक्टू॰) तक, फिर ध्रुव 01:56 (5 अक्टू॰) तक
- करण
- गर 09:06 तक, फिर वणिज 20:02 तक, फिर विष्टि 06:50 (4 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:59 – 12:47परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:23 – 13:53
- यमगंड07:54 – 09:24
- गुलिक काल10:54 – 12:23
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:25 – 07:54
- अमृत(शुभ)07:54 – 09:24
- काल(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:54
- शुभ(शुभ)10:54 – 12:23
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:23 – 13:53
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:53 – 15:22
- चर(सामान्य)15:22 – 16:52
- लाभ(शुभ)16:52 – 18:21
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:21 – 19:52
- शुभ(शुभ)19:52 – 21:22
- अमृत(शुभ)21:22 – 22:53
- चर(सामान्य)22:53 – 00:23 (4 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:23 (4 अक्टू॰) – 01:54 (4 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:54 (4 अक्टू॰) – 03:24 (4 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)03:24 (4 अक्टू॰) – 04:55 (4 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:55 (4 अक्टू॰) – 06:25 (4 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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