पंचांग 26 अक्टूबर 1989

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

26 अक्टूबर 1989 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:31
सूर्यास्त18:05
चंद्रोदय04:30 (27 अक्टू॰)
चंद्रास्त16:01
मास:
आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1911 · विक्रम (चैत्रादि) 2046
संवत्सर:
शुक्ल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
सिंह 07:01 तक, फिर कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 13:23 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 15:52 (27 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
उत्तराफाल्गुनी 03:11 (27 अक्टू॰) तक, फिर हस्त 06:11 (28 अक्टू॰) तक
योग
इन्द्र 21:28 तक, फिर वैधृति 22:21 (27 अक्टू॰) तक
करण
तैतिल 13:23 तक, फिर गर 02:36 (27 अक्टू॰) तक, फिर वणिज 15:52 (27 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
  • राहु काल13:45 – 15:11
  • यमगंड06:31 – 07:58
  • गुलिक काल09:25 – 10:51

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:31 – 07:58
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:58 – 09:25
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:25 – 10:51
  • चर(सामान्य)10:51 – 12:18
  • लाभ(शुभ)12:18 – 13:45
  • अमृत(शुभ)13:45 – 15:11
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:11 – 16:38
  • शुभ(शुभ)16:38 – 18:05

रात

  • अमृत(शुभ)18:05 – 19:38
  • चर(सामान्य)19:38 – 21:11
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:11 – 22:45
  • काल(वर्जित (परंपरा))22:45 – 00:18 (27 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)00:18 (27 अक्टू॰) – 01:52 (27 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:52 (27 अक्टू॰) – 03:25 (27 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)03:25 (27 अक्टू॰) – 04:58 (27 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)04:58 (27 अक्टू॰) – 06:32 (27 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

अपनी कुंडली देखें