मृगशीर्ष नक्षत्र (Mrigashira)
27 में से 5वाँ नक्षत्र · निरयन 53°20′–66°40′
- दशा-स्वामी
- मंगल — विंशोत्तरी में 7 वर्ष
- देवता
- सोम
- प्रतीक
- मृग-मस्तक
- गण
- देव
- विस्तार
- 13°20′ (चार पद, हर पद 3°20′)
चार पद
| पद | राशि में अंश | नवांश राशि |
|---|---|---|
| पद 1 | वृषभ 23°20′ – 26°40′ | सिंह |
| पद 2 | वृषभ 26°40′ – 30°00′ | कन्या |
| पद 3 | मिथुन 0°00′ – 3°20′ | तुला |
| पद 4 | मिथुन 3°20′ – 6°40′ | वृश्चिक |
पद की गणना: नक्षत्र में बीते अंश ÷ 3°20′। हर पद एक नवांश के बराबर है। सीमा के पास जन्म हो तो मिनट-सेकंड तक सटीक जन्म-समय ज़रूरी है।
दशा से संबंध
जन्म के समय चंद्रमा मृगशीर्ष में हो तो विंशोत्तरी दशा मंगल की महादशा से शुरू होती है। नक्षत्र का जितना भाग चंद्र पार कर चुका हो, उतना भाग इस 7 वर्ष की महादशा में से पहले ही बीता माना जाता है — बाकी ‘जन्म के समय शेष दशा’ है। दशा समय-पठन का साधन है, किसी घटना की गारंटी नहीं।
देवता और प्रतीक सांस्कृतिक स्मृति हैं, वैज्ञानिक कारण नहीं — इन्हें व्यक्ति के बारे में निश्चित निर्णय की तरह न पढ़ें।
पुस्तक में कहाँ पढ़ें
- अध्याय 8 · 27 नक्षत्र, पद और चंद्र की स्थितिपृष्ठ 30
- पद की गणनापृष्ठ 31
- विस्तार 3 · नक्षत्र विश्वकोशपृष्ठ 57
- अध्याय 10 · विंशोत्तरी दशा और समय-पठनपृष्ठ 36
पृष्ठ-संख्या ‘व्यावहारिक कुंडली विज्ञान’ (अष्टम संस्करण, 166 पृष्ठ) की है।
यह पुस्तक शैक्षिक अध्ययन-सामग्री है। इसमें दी गई ज्योतिषीय व्याख्याएँ पारंपरिक और सांस्कृतिक अध्ययन के लिए हैं; वे निश्चित भविष्यवाणी, चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं हैं।